किउ कुछ कैक खा कठ
किउ कर्लक खा कठ
अह
जान पहिचान कर खोज्नु
दिमागके जरसे जो
न शब्दम भेटिनु
न डगरम भेटिनु
न चोक चोकम
के आफन्त के पराई
सम्बन्ध आफसे आफ जोरगैल
अडिक रह निसेक्ना रैछ मन
स्थिर रह निचाहल जीवन
डौरति रहल गन्तव्यहिन लक्ष्य खोज्ति
सायद...
ढकढिउरि भरिक मैया ओत्र बा
ढकढिउरि भरिक पिर ब्याठाफे ओत्र
जहा आखिरी सास सम्म जोर्ना
एक्ठो बाहाना मुस्कान ट रैछ .........
......... मुस्कान ............
©® Bisnu kusum
