अपने के लागल नशा,. का हुइल थरुहट के दशा !
Friday, 11 May 20180 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस
Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}
अपने के लागल नशा,..
का हुइल थरुहट के दशा,
थारु इतिहास मे सुन्दर सुन्दर
अपने थारुके अनेक भेषभुसा,
प्यारा बा इतिहासमे अपने ,
अनेक बोली थारुके मिठामिठा भाषा,
नाही हराइत थारु के इतिहास मे
कबो पहिचान और थारु नाम,
हम त जगाइत बढाइके सब थारुके पहिचान,
आदिवासी पहिचानवादी अपने थारुके सान,
सदा अमर रहत थारुके पहिरन पहचान,
जन्म हुइल सोख से,
नेपाल माइ के कोख मे,
उजागर भइल आदिवासी,
थारु कहिके इन्द्रलोक मे,
नाइ नाइ नाइ कहुँ अपने के थारु,
सवकोइ मिलजुलके पहचान करुँ,
थारु कहिके हेपत नाही परल बिपत,
सब थारु एकताके लेल खेलम सपथ,
थारु के परिवेश के बचाइ सवकोइ जुटु,
एक दोसर मे हाथ मिलाउँ कोइ नाइ फुटुु,
थारुन के परिवेश जाइ रफ्तार मे,
थारु के वीर पुरुष परल गिरफ्तार मे,
चालू कदम उठाउ आवाज एकसाथ मे,
तिर धनुष गुलैता कचिया सव ले हाथ मे,
दम बा थरुहट के थारु के इतिहास मे,
शासन सत्ता भत्ता रहल नेता के हाथमे,
जाती बिवाद जनम देलक हर जातजात मे,
थारु भुमिपुत्र जेलखानाके भितर बिताइल रातमे,
कोइ बा थारु वीर पुरुष आउ आउ हमार साथ मे
दम बा थारु के पहिचान मे,
पुर्व पश्चिम् एक बा थारु इतिहास मे,
हर दिन हर रात खोजत थारु के नाम,
बाहुनवाद खोजत थारु के बदनाम,
का हुइल का हुइल नेपाल के ईतिहास,
नेताकार्यकर्ता के हुइत आब पर्दाफास,
नेपाल माँ के चोट लागल थारु इतिहास,
थारु के मागमुद्दा पूरा करुँ थारु इतिहास,
थारु एकता आजके आवश्यकता के खाच,
बाहुनवाद के करुँ सब मिलके सत्यानास,
लेखक : थारु युवा साहित्यकार सुरेश चौधरी,

