क्यो चोट दिते उहीँ आपन कमजोरी नबनये

Sunday, 8 January 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

थारु मुक्तक

क्यो चोट दिते उहीँ आपन कमजोरी नबनये
ओकर आघे कब्बो आपन अंश नघिरये ।
राहल कला बिगारेवाला तामन राथन समाजमन ।
झुट तारिफ हे आपन मानेम नसाजय।।
क्यो चोट दिते उहीँ आपन कमजोरि नबाए ।
ओकर आघे कब्बो आपन अंश नगिराए।

पिन्टु राम चौधरी ।
गुगौली ४ लोहरौल ।
कपिलवस्तु ।।

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