थारु मुक्तक
क्यो चोट दिते उहीँ आपन कमजोरी नबनये ।
ओकर आघे कब्बो आपन अंश नघिरये ।
राहल कला बिगारेवाला तामन राथन समाजमन ।
झुट तारिफ हे आपन मानेम नसाजय।।
क्यो चोट दिते उहीँ आपन कमजोरि नबाए ।
ओकर आघे कब्बो आपन अंश नगिराए।
पिन्टु राम चौधरी ।
गुगौली ४ लोहरौल ।
कपिलवस्तु ।।
