रंग बदली समय समय रंग बदलल।
दल दलमे फसल थारू दल।।
उठके थारू जनतान उठाईथ की।
डुबके थारू पहिचान डुबाईथ।।
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देश धकेल्ता की द्वन्द ओर धिरे धिरे।
देश चलुईया फे छुट्थै कबु जुट्थै।।
सोझ जनता हेरेक भर हेरथै।
नबुझैना नाही बुझ्न कोसिक कर्ना।।
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अपन स्वार्थके लग जनता मर्न।
लरो जनता लराकुनसे नेता भग्न।।
हाथेम मुन्टम बधल पाटीक पट्टी।
हर चुनाउम थारू बातै हट्टी।।
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जुट्ही कब सक्कु थारू जनता ।
ओड्रम मुस डबलेक डबल आतै।।
दौरतै आजकल गाउमे दारू लैके।
धेला भुर्राईता चलो प्रचारमे हर धैके।।
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जाउ जिताउ थारूनेके जीत हुई।
हितल थारू हे ओहे मतसे कत्रा हिट हुईत।।
मौका चुकजाई उठे नाई पैबो चुपाईल रहो हो।
हाँसो आजिक दिन काल्ह हाँसे नाई पैबो।।
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जे थारू अगुवा ओहे ठगुवा।
पाछे पाछे कर्न नेतानके पिछ लगुवा।।
चिन्हो कबो चिन्हके फे का कर्बो।
मार पाके मरजीबो उलितके नाई मर्बो।।
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घरके बाघ बनके बिलार जस्ते।
मत नबेचो मत्वारमे ओस्ते।।
खुद लुट्तो थारू गाउँ लुटाईतो।
अन्धारमे बैठले जिन्गी बिताईतो।।
लेखक:=असिराम डंगौरा
