कमाइ जैठु आँखी मिस्टी,बिहानी बिहानी उठ्के
आरामके खोजिम निकर्ठु,घरम मै आराम छोर्के
काम करेक्टे जियल बाटु,,या जिएक्टे काम कर्ठुँ
सोँच्ठु बस इहे आइठु जब,सिह्रल कामसे लौत्के
ए जिन्दगी अब डट्कर गैनु हर हिसाब डेउ महिं
आउ मै बैठल बाटु आसाम दिलके डवार खोल्के
सिकायत तो बहुत बा!! टुहिनसे,डियर जिन्दगी!
चुपाइल हेर्तु काजे कि मुस्किलसे मिलठ सोँच्के
कमाइ जैठु आँखी मिस्टी,बिहानी बिहानी उठ्के
आरामके खोजिम निकर्ठु,घरम मै आराम छोर्के
लेखक=अमीन बर्दियाली
