लरम कोमल रठा दिल पत्थर ले बिग्रैठा।
फुल्ठा फुला भौरानके टक्कर ले बिग्रैठा।।
बेली चमेली घुनेस्रा मगमगैठ फुल्क जब।
रहल महकता से ढ्यार अत्तर ले बिग्रैठा।।
देख्जिठा सपना रहर हजार रहि हमार।
बिना पुग्ल चाहाना उ पत्झर ले बिग्रैठा।।
सुन्ठु कथा क्या! बादशाह रह दुनियाँम।
साम्राज्य कमजोर ह बल्गर ले बिग्रैठा।।
भाग्यम बा कैख डोकोम दूध दुख हुई।
अभागी क लाग एक नम्बर ले बिग्रैठा।।
राज दङ्गाली
तुल्सिपुर दाङ
