हर आँसक बुँदम् एक समुन्दर नजर आईठ

Monday, 13 February 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

गजल

हर आँसक बुँदम् एक समुन्दर नजर आईठ
तबाही  हुईट जिन्दगी अक्सर नजर आईठ

कहाँ ढारुँ कैसिक जोगाउँ सिसाक दिल मै
हर मनुष्य'क हाँथम*&पत्थर नजर आईठ

एक दोस्रेक सपना रौँड्टी आघे बहर्टी दुन्या
अत्भुत ढर्टिम् अजिबके सहर नजर आईठ

हेर्ठु जब मै नियालके जिन्दगीक हर मोड्"म
कदम कदम पर खाईट ठक्कर नजर आईठ

देख्ठुँ हरेक रात सपनाम कह्टी अँङ्गना हिन्
टुहार बिन सुन्सान यहाँ गाउँ घर नजर आईठ

बर्दियाली
अरेबिया

photo capture  by tilak parsad pun

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