थारु मुक्तक
कतुरो मायाँ कर्सही तोरके
पराई भई देलही तोइ।।
सङ्ही बैठिके कसम खाईके
मोरके छाणिके गेलही तोइ।।
सङ्ही जिएके सङ्ही मरेके
बाचा कसम खेलही पहिले।।
कथी गल्ती रहलै मोर
पराई भई के गेलही तोई ।।
by: Bhoj Mahato
Nawalparasi
थारु मुक्तक
कतुरो मायाँ कर्सही तोरके
पराई भई देलही तोइ।।
सङ्ही बैठिके कसम खाईके
मोरके छाणिके गेलही तोइ।।
सङ्ही जिएके सङ्ही मरेके
बाचा कसम खेलही पहिले।।
कथी गल्ती रहलै मोर
पराई भई के गेलही तोई ।।
by: Bhoj Mahato
Nawalparasi
