मैगर टुहार यादसंगे,रुवाई बहर्टी जाइठ(थारु गजल)

Thursday, 20 April 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

जस्ट सम्सम सम्सम,,साँझ पर्टी जाइठ
मैगर टुहार यादसंगे,रुवाई बहर्टी जाइठ

आइठ याद टुहार,,भिजाठ सिर्हन्नी मोर
ढक्पक ढक्पक ,ढक्ढिउरा कर्टी जाइठ

सम्झठु संगे बिटाइल,उ हमार मैगर पल
बड्बड्बड् ई नयनसे आँस झर्टी जाइठ

झम्झम् झम्झम् मोर आँखी, बन्ड हुइठ
रसरस मोर जियारा आसम मर्टी जाइठ

चाह्के फेन पार कैसिक करूँ डिवार मै
हरेक कडम जो याद संग्गे गुजर्टी जाइठ

          गजल लेखक:-सलिना के.सि.
                               हाल कुवैत
                           बर्दिया मगरागाडी

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