सावनमे खै काहे खुब घल्लो हरियार चुरिया बाबु।

Friday, 28 July 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

[[ठारु गजल]]
"
सावनमे खै काहे खुब घल्लो हरियार चुरिया बाबु।
मनैना लाज लागथ थारू टिहुवार गुरिया बाबु।

आईती बा भदौम गैरथारू नारीनके तीज दौरल।
सारीम नच्बो कैहके मै गोला सुर-सुरिया बाबु।

महिन टे मोर गाउँ बचपनके यादे मजा लागथ।
संघरियान संग खेलल बनाके घुर-घुरिया बाबु।

अब हमार थारूनके टर टिहुवार छोर्ती जाईतो काहे?
नभुलैहो हमार पूजा हरेरी,लवाङगी धुरिया बाबु।
"
असिराम डंगौरा
      कैलाली

Admin : अंकर 'अन्जान सहयात्री'

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