[[ठारु गजल]]
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सावनमे खै काहे खुब घल्लो हरियार चुरिया बाबु।
मनैना लाज लागथ थारू टिहुवार गुरिया बाबु।
आईती बा भदौम गैरथारू नारीनके तीज दौरल।
सारीम नच्बो कैहके मै गोला सुर-सुरिया बाबु।
महिन टे मोर गाउँ बचपनके यादे मजा लागथ।
संघरियान संग खेलल बनाके घुर-घुरिया बाबु।
अब हमार थारूनके टर टिहुवार छोर्ती जाईतो काहे?
नभुलैहो हमार पूजा हरेरी,लवाङगी धुरिया बाबु।
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असिराम डंगौरा
कैलाली
Admin : अंकर 'अन्जान सहयात्री'
