पुरब थारु भाषाके साहित्यिक कविता:-"एक थारु"

Wednesday, 22 November 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

कविता,,
अचरा खडकि चोलिया पुर्वी थारु के आन बान सान 
थारु युवा साहित्यकार सुरेश चौधरी मोरङ, ग्रामथान,।
युवा युवती मिलिजुलीके गावं समाजमे परिवर्तन आन,
थारु एकता आजुके आवश्यकता सब थारु सव जान,।।

तोरे सियान के आवाज से थारु के आवाज हेति,
तोरे सियानके आवाजसे थारु समाज ताज पिन्ती,।
तोरे हमरे साथ समर्थनसे थारुसव आपन सास लेति,
तोरे हमरे समाज के माँ बापु बहिन ददा तब एक हेति,।।

जागम थारु जागम थारु देवम थारु के आवाज,
तोरे हमरे आवाज सेहि बदल्ती तोर हमर समाज,।
तोरे कुन हमरे कुन समय छेके थारु के बलवान्,
सवना थारु जाग्ते त थारु के आवाज कर्ते आह्वान,।।

थारु के आवाज आजकाल करल्के सेवा के मुल काम,
थारु समाजके एकदिन जगते इतिहासमे राखते नाम,।
थारु एकता आजुके आवश्यकता छेके एहया मुल नारा,
थारु के आवाज से जागृत हेते थारु समाज गोटे सारा,।।

थारु के आवाज थारु के समाद थारु के नारा,
त्याँ बदल हमे बदल्वी बदल्वी गाउं समाज सारा,।
थारु एकता आजुके आवश्यकता छेके मुल नारा,
सोच बदल गाउं बदल बदल गाउं समाजके सारा,।।

लेखक:-थारु युवा साहित्यकार सुरेश चौधरी मोरङ खुनियाँकटा,
विवेकशील थारु युवा समूह मोरङ सुनसरी के जन्मदाता,

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