थारु_भाषक_गजल,,
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विश्वमे इतिहास लिखैना बा ।
समाजमे विज्ञान बतैना बा ।
कि का हाे थारुनके पहिचान ।
राेईते जनतानहे हसैँना बा ।
तराईके अादिवासी हमरे थारु ।
पुर्खाैली,,,पहिरान बचैना बा ।
बाध्य बात्न दुखिया मर्से बँचेक ।
उहे बदल्ते इतिहास¢चुकैना बा ।
(राम अवतार अन्जान)
[शिवराज न.पा.३, कपिलवस्तु]
