छैको छैको मन्द्रा ओ डफ,बजैटी मजा लागठ।
हाट चट्टी सिध्रक् टिना फे,खैटी मजा लागठ।
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दशियां आइजाइठ,घर-दुवार लिपपोट कर्टी।
उह हिल्ला,गोबर,माटी, खेलैटी मजा लागठ।
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सुप्पा संगे ढिक्री उसिन्ना,धकिया पैन धोइटी।
देवदुर्गन सिंगार-पटारसे,सजैटी मजा लागठ।
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पित्तर अस्राइबेर,करैक डारु,अन्डिक झोरसंगे।
पिके नच्टी उहे छैलिन् फे, नचैटी मजा लागठ।
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कानेम् जेंउरा,माथेम टिका,एकडोसरमे लगैटी।
ऊ डौना बेबरिक् माला,मग्मगैटी मजा लागठ।
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अंकर "अन्जान सहयात्री"
पथरैया-4 जबलपुर,कैलाली
