मुक्तक
तु मोर हुइतो कैके गाँऊमे धाग लगैली ऊ संगे बैठ्ना दादु,भैयान के भाग लगैली ऊ
सोचल रहु मै सक्कू जे मिलके बैठप हम्रे खुशिया भरल जिन्दगी मे दाग लगैली ऊ
बिग्रल चुक्कू राम कुमार डंगौरा थारु पथरैया८,बोक्लौहुवा,कैलाली
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