जब दिनसँगे
हुजाई अन्धार तब
दियाके
जगमगैईना
जरूरी बा ....
जब प्यारके
बाट हुई लागी
बजारमें, तब
प्रेमी ओ प्रेमिका
हे बचैईना
जरूरी बा ....
जब देशमें खतरा
हुई गड्डारीन से
तब गड्डारीन
यि थरूहत भुमिसे
मेंटैईना
जरूरी बा ....
जब चिमचाम हुईती
रहही युवा यि देश
के, तब ओईनहे
सही ड़गर
देखैईना
जरूरी बा .....
जब सक्कु ओर फैईल
गैईल निराशा
देशमें, तब
क्रान्तिके बिगुल
जगैईना
जरूरी बा .....
जब नारी हुक्रे खुड़के
एक्केहेली पैही
तब ओईनहे यि समाजमें
अाघे करैईना
जरूरी बा ...
जब नेतनके हातमें
सुरक्षित नैरही
देश, तब फेन
लावा किरण हमहन
मगैईना
जरूरी बा ....
जब हमार माग
सिधा तरिकासे
नै मिली तब फेनसे
अान्दोलन
चर्कैईना
जरूरी बा ........
बिरेन्द्र चौधरी जलन
हाल मुम्बई वाशी
