कैलालीको थारु भषामा मुक्तक ल पढ्नुस

Sunday, 26 November 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

अक्के मेरके समय नै रहठ कबु जार टे कबु घाम,
टबेमारे हुई एकर करबो कबु नाम टे कबु बडनाम !

जब बिहान हुइठ ओ निस्चिट बा साँझ्या जरुर हुइ,
जान बुझके फे जो ओजरार खोज्ना नैमजा काम !

गजबके बा ई सँसार ई डुनिया बुझ्न कठिन कबु टे,
अँग्री उहिन मनो टिन अँग्री महिन नै बुझ्ना टमाम !

रुपिया पैसा ढन्डौलटके पाछे आखिर कहाँ सम टे,
कबु टे लागठ इहे सब्ठोक हो डेख्के मनैन्के जाम !

मै भारी टैं छोट अपनही आपन बयान करलेसे फे,
बानी व्यबहार मजा इहिसे भारी कोइ नै हो चाम !

एच एम चौधरी
कैलारी ४, कैलाली ।

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