** मोर चितावन **
मोर गाउँ,मोर ठाउँ,मोर चितावनक मटिया.....
खुसी लग्सउ गर्भसे,चौडा हसउ छतिया......!
ताल-तलैया बिचित्र बणउ बिछे बिच बनवाक....
खाभे जुड नरेनियाक पनिया,अझै बाडकि रप्तिया....!
गाछ-बृछ उड उडके खाये फल पन्छी
पानी पिये जङ्ली जन्तु,लहैना खगहा हथिया....!
हरियर-हरियर खेतक फाट कबहुन हखिहे खाली
धन्ये हमरा किसान सभ,पाके ईय धर्तिया....!
सयौं थरी जातजाती सायौ चालचलन
मिलके बैठल बाडि सबहु,डाहा कर्सिहे रतिया....!
मोर गाउँ,मोर ठाउँ,मोर चितावनक मटिया...!
खुसी लग्सउ गर्भासे,चौडा हसौ छतिया......!!
लेखक:- मनु चौधरी (हाजिपुर)
