लगैठो धाक कठो टुहिसे का कम साईली

Saturday, 4 February 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

गजल

फुलैटि बर्काचो पत्कैठो फे चुईगम साईली।
लगैठो  धाक कठो टुहिसे का कम साईली।।

जब्वा डब्वा नि चलट परदेश म कठ यार।
रूस्लन,टिचर चल्ठा हु खुकुरी रम साईली।।

धुम्री, ठुमा, गुञ्ज्या नाउँ फेर्क स्विटि बन्ल।
जब हुईठा रात बन्ठ गाँठे एटम बम साईली।।

जार्या कुक्रा लघार दिहेम कहल झुम्रि महि।
वाकर घर जैना नै अाईट फुरसे दम साईली।।

प्याल्या लागल लर्का पैल हु झिल्के हुक्र जे।
बिग्रार कर्लक हुईन खाईल उ रमपम साईली।।

नाराण नाराण राधे राधे😃😃

दङ्गाली साहित्य

Share this article :

Ads2
SHARE THIS POST IN YOUR CHOICE LOCATION

 
Copyright © 2017 - हमार सनेश डटकम.COM - All Rights Reserved.
Design By :- Nabeene Chaudhary | Powered by :- Deepa Mht

| Home | About | Blogs | Contact | RSS*

Admin / Editor :- RN Chau.. Tharu