~साली हसे भाटु क गफ~
जहवा भाटु वहवाही साली कथी देबे भाटु मोरके फगुवा क पहुरा।
पाबनी फगुवा कहले ओरेलउ भाटु खेवबसु तोरके तिउना गुनुहुरा।।
नाहि खेबहो गुनुहुरा तिउना हैनो यन्ले मुई फगुवाक फहुरा।
जिलैबै नहिया देखइ मुई सोझ भटेर लगादेबहु तोहरा के ससुरा।।
कुमाइ भटेर तुहि बाणे सर्हेजी क ओरि हेर्बो न करई ।
गहना गुरिया नाही मङ्बसु भाटु कतउ हसही लोकते लोकते भगई।।
फुला देले लेवहिन भाउ कथी देवके मुइे तोहराके पहुरा।
यैहन भेटे मोर के तोहे पुर्बारी गाउँ धमौरा।।
चैत क बहल बयार बैशाख मा उणेलउ धुरी।
यैसन बात सुनबिहे दिदी देबिहे तोर मोहवा थुरी ।।
यगिली सुन पछिली बिचली गगरिया मे सितल पानी।
महुवा क फुला जैसन सजाके लिगबसु बनावे यापन जनि।।
Chitwan Chhannu
खैरहनी ~१ ,बहेरा।
