धनक नहि मैगर मैयक ना भिखारी हुईटी जनहो

Wednesday, 15 March 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

गजल

कत्ठि कठी मस्री अस्री उह पियारी हुईटी जनहो।
किसन्वक  छाई दुखी म्वार बिचारी हुईटी जनहो।।

दुर  देश  सात समुन्द्र पाहार बाटु अस्या लग्ठी हुँ।
धनक नहि मैगर मैयक ना भिखारी हुईटी जनहो।।

अासँ केल लगाए असक हुईटी बाट परदेश बैस्क।
कहुँ  कलसे  हिरडाके हजुर बिमारी हुईटी जनहो।।

सिकार माछ मच्छि खासै मन नि परैना हेरी ना उ।
पहुँना पाछर गैलसे जात्तिक सिकारी हुईटी जनहो।।

फोन कर्ठु सद्द सद्द बोली नै सुन मिलट अाजकाल।
बिग्रल मोबाइल होकि बाटक सिपारी हुईटी जनहो।।

रमेश दङ्गाली राज
तुल्सिपुर दाङ

Share this article :

Ads2
SHARE THIS POST IN YOUR CHOICE LOCATION

 
Copyright © 2017 - हमार सनेश डटकम.COM - All Rights Reserved.
Design By :- Nabeene Chaudhary | Powered by :- Deepa Mht

| Home | About | Blogs | Contact | RSS*

Admin / Editor :- RN Chau.. Tharu