गजल/सायरी,,
लोरही के फुलवा टुरे गेलसु बेलवा क पतवा,कटवा धसलिहे मोर हात मे।
प्यासल पनिया सुखी गेलो मुहवा,देलो छउणिया महुवा क पात मे।।
हसि देलो छौणी बिहिस बिहिस,मन मोर मुरछाई गईल हो।
पतझर महिना बन्के सजनिया,उहे छउणिया से मोर प्यार भईल हो।।
महुवा के डारी पाते पात सर हर,लागे तोर सितरी बयार।
दर्पण तोर तस्बिर थारु क पहिचान,सजल तुई गहनी छबिगर देखार।।
चली गेलो छौणी तुइ बिच बजार ,हजारो देखार छौणी तुहि दगिसार।
माया मोह मा भिजी गेलसु छौणी हमार पहिचान तुहि हले मोर सन्सार।।
Chitwan Chhannu
खैरहनी :~१ ,बहेरा
