मस्त मस्त जवानी तोर सियाके देखिके लाग्ली बोर

Monday, 19 June 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

मस्त मस्त जवानी तोर सियाके देखिके लाग्ली बोर,
एकर ओकर मे जरिके नै एकता से ल्या ले मोड,।
गाउँ घरके समस्या देखिके लागि गेलिस आव बोर,
कतन्या रहवहै लोकले त्याँ निक्ली जो खोलिके खोर,।।

हास्छुन अस्करे तोर सियान निकाल्छै आँखिसे क्याम लोर,
एक दोसरके मनमुन्टाव छोडीके मुझावहै आगिनके धधोर,।
कते गेलेस हमर बवगुदी कते गेलेस हमर भ्या ददा के सोर,
मत हो उदास मत हो निराश आवि गेनुस देखे समाजके लोर,।।

तोरे माया से पेनुस हम समाज मे इज्जत मान सम्मान,
इज्जत दयाके मान दयाके क्याम कर्छै तोरसी बदनाम,।
कर्थै छुहुन कर्थै रहउ माया आर थारु भासा मे गुणगान,
थारु कला संस्कृति जोगल जेते रहतै इतिहासमे सदानाम,।।

थारु जात सोझ जात एक दोसर के खान्दानी रितिरिवाज,
मोरङ सुनसरीके थारुके छे के लगछे एकर ओकरमे बात,।
युवा एकता आजु के आवश्यकता हावम एहया छेके आवाज,
कुनदिन नै सम्झने देनेश आपन हृदय मन खोलिके समाद,।।

थारु युवा साहित्यकार सुरेश चौधरी मोरङ खुनियाँकटा,
विवेकशील थारु युवा समूह सुनसरी मोरङ के जन्मदाता,।
नहि कर्निस भेदभाव  देल्केछल बहुत आशा आर भरोसा,
वेहयासे आजतक फेक्ते छिहिन समाज सुधारके डोर रशा,।।


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