गजल,,,,,,,,,,,,,
कैसिक कहुँ कि कठ्यक मैया लागठ टुहार
रात दिन मोर मन केवल संग खोजठ टुहार
रातके सपना बन्के दिनके कल्पना बन्के
जो की उठट बैठट् याद मण्ड्रैटी रहठ टुहार
दिलके दिलसे कनेक्शन हुके हुइ न प्यारा
मन खुसी तब हुईठ जब बोल सुनठ टुहार
दिल्हे बेचैन देख्के पुछ्नास् लागठ प्यारासे
मोरिक मन जस्टे टर्पठ किनाई टर्पठ टुहार
मोर प्यारा महिंन्से दुर हुइलेक कारणसे हुई
जब रहठ तब मोर मन खोजी करठ टुहार
लेखिका := सलिना के.सी.
