जब मोई लिखईक रहबही,
तोई उ..भावनाके हेरसी,
शब्द शब्दमा तोही बसल,
....अरी मोर सखी..।
जब मोई टोलाईके हेरबही,
तोई उ..अॅखियाके हेरसी,
प्रत्येक नजरमा तोही बसल,
.... अरी मोर सखी..।
जब मोई मूस्काईके हसबही,
तोई उ..अनूहरवाके हेरसी,
अनमोल खूसीमा तोही बसल,
....अरी मोर सखी..।
जब मोई अन्हार हखबही,
तोई उ..तरङनवाके हेरसी,
उहवासे तोई टूटके खसल,
....अरी मोर सखी..।
.... ह....तोई मोर सखी..।
. ....D.....
-दिनेश महतो(अक्शु)
कावासोती -14 डाणा
