बुक्रा चुए लागि तब खर का कर्बो।

Friday, 23 February 20180 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

गजल ,,
बुक्रा  चुए  लागि  तब  खर  का  कर्बो।
जब अपन निहो त औराक भर का पर्बो।

एकान्ट ठाउँ मन चुमाईल  पला त बा जे।
कबु  एहोर  कबु  ओहोर  घर  का  सर्बो।।

केहुँक चोरी ना चकारी अपन कमाईती।
खाईती  त  मनमा  नुकाके  डर का ढर्बो।।

तुहीँ त  हुईतो तुस्सा पलैना पलाके हाङ्गा।
सित्तर, जुर,  छाहीँ  देना  जर  का  जर्बो।।

मैया  करुईयनके मनमा  मैयाँ  हुई  परठ्।
मैयाँमा धनी, गरिब छ्वाट बर का ह्यार्बो।।

नविन देशाउरी थारु
बैजनाथ 4 नौलापुर (बाँके)

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