चाहे जौन ब्यक्तिके जीवनमे उतार चढाव,सुख दुःख आइत चाहे उ गरीब हो चाहे धनी हो,चाहे सन्त हो चाहे फकीर हो सबके जीवनमे समस्या हैरानी परेशानी आइत । लेकिन कहेलन सुखमा मात्तिनु हुदैन,दुःखमा आत्तिनु हुदैन उहेक नाते कौनो भी प्रकारके कष्ट परेशानी आए लेकिन ज्यादा चिन्ता नाई करेक चाँही बल्कि चन्ता नाई चिन्तन करेक चाँही । कहेलन चिन्ता कइले से बार बार मरेक परत उहेक नाते चिन्ता छोडलजाय अब चिन्तन कइलजाय आउर आगे बढलजाय ।
चिन्ता एक अइसन रोग हो, जउनकि कब्बो भी हम्मन विचारमे कौनो धुन हस लग जात, औ हम्मन भितरे भितर खोखर करते रहत । एहमे विचारके अइसन प्रवाह होत, जउन कौनो भी घटनासे पहिले ओके हानिकारक परिणामके आशंकासे सहजे ही उपजे लागत औ प्रश्रय मिललेपर बढत जात । चिन्तक स्वरुप नकारात्मके रहत एहिक कारण चिन्ता करोइया मनइ स्वास्थ्य होएक बजाए दुर्बल औ कमजोर देखाए लागलन । चिन्ता कइलेक कारण कुछ ते नाइ कइ पालन वकिन एकहिएसे परेशान होइ जालन । वोकहन रातके नीन गायब होइ जात।
एक विचारकके कहना बाकि ‘चलेक तइयार होइल जहाज या जलयानमे सोचे विचारेक शक्ति होत ते उ सागरके छलाङसे, डेराजात कि छलाङ वोके खा लेइ, औ कब्बो भी बंदरगाहसे बहरे नाइ निकरत, फिर उ इ भुलाजात कि वोके एक समयमे अथाह सागरके एक तरंगसे निपटेक परत, वकिन जलयान सोचे नाइ सकत, यिहेक खर्तिन वोके कौनो चिन्ता नाइ होत कि पानीमे उतरलेक पाछे वोकर का होइ, उ ते केवल चलत ।’
ऐसहि यदि हमरे संकट वा परेशानिक बारेम सोचके घबरा जाब ते विकासके रहवम हम्मन एक परगा भी आगे बढेक दुर्लभ होइ जाइ, काहेसे कि चिन्तक कारण आशंका, नकारात्मक कल्पना हम्मन रहवक अवरुद्ध कइ देइ औ हम्मन आगे बढेक वा रहवा देखाएवाला कौनो प्रेरक तत्व नाइ रही । एकहिएसे कहलन कि यदि मन ढेर आशंका, बेकार परिणाम वा नकारात्मक कल्पनासे भरल रहिते अकेलेमे कब्बो भी ओके बइठके सोचेक नाइ चाही, तुरन्त अपन मनके कौनो काममे लगाएक चाँही, काहेसे कि काम कइलेसे मन चिन्तक बदला काम करे ओर लग जात । साथे एकर एक समाधान यिहो हो कि हम बढिया मनइनसे अपन मित्रता बढाइ, बढिया मनइनके सम्पर्कमे रही, एकर प्रभाव भी हम्मन चिन्तासे मुक्त करात, आगे बढेक रहवा देखात । सज्जन लोगनके काम औ वोकहनके जीवन शैली वा विचार शैलीक देखके हमरे हालियेसे अपन ब्यर्थके चिन्तासे मुक्त होइ जाली औ स्वस्थ्य जीवन जिए लागली ।
जउन मनइ अपनके हरदम अभागा सम्झलन, स्टेशन पर हरदम उहे समय पहुचलन, जब गाडी निकर जात । जे बजारसे ढेर ढेर दामके सामान खरीदके ओके कम दाममे बेचलन, वोकहन भविश्यमे का होइ, एकर अनुमान हलिएसे लगा सक जाइ । कुछ मनइ यात्रा शुरु होएसे पहिलही खराब मौसमके शंका करे लागालन, वायुयानके सङहरी भयंकर दुर्घटना होएक भए करे लागालन औ उडान भरेसे पहिले भयसे ग्रसित होइ जालन । एकर उल्टा अइसन भी मनइ होलन, जेकरे कौनो प्रकारके शंका– उपशंका नाइ करलन औ अपन जीवन निर्बाध रुपमे जीयत रहलन ।
प््रासन्नचित ( खुशी ) रहेक एक उत्तम उपाए एक जने पुछलन कि आप कउन मेर अपन मानसिक आनन्दके स्थिर रक्खे सकलो । ते एक मनिषी कहलन– “ मइ अपन मनके कौनो भी आएवाला दुर्भाग्यके आशंकासे ग्रस्त होए नाइ देलु । मइ हरदम सौभाग्यके आशा करलु औ यदि कब्बो अप्रिय प्रसंग या कष्ट आ भी जात ते ओकहियो अपन प्रिय बनालेहलु । ओहमे भी कौनो प्रसन्नता औ आनन्दके रहवा खोज लेहलु ।”
युगो–युगसे मनइ स्वभाव अनुसारसे तमान मेरके संभव वा असंभव चिन्तासे घिरल रहलन । चिन्ता, भय, त्रास आदीके चंगुल मनइनके हरदम बान्हके रखलहि रहत । इहे कारण मनइ भयभीत, चिन्तित औ पीडित रहलन । कौनो संकट आएक आशंका, कौनो दुर्घटना होएक भय, अस्वस्थ्य होएक डेर, कौनो रोग होएक भय, आगी लगना भय, भुइचालके भय औ मरेक डेर–यी भय मनइनके हरदम डेरुवइते रहत, सतइते रहत । समय समय पर भयवाला तत्वके संख्यामे बढते जात औ एकर साथे असफल होएक भय, कर्जा ( ऋण ) बढेक भय मनइन जीवनमे आउर दुःख बढा देहत । यी मेर मेरके भय दुर्वल औ कमजोर मनइनके ढेर डेरुवाइल करत औ भगवानके अस्तित्वसे वोकहन संबन्ध– विच्छेद कइ देत । अर्थात अइसन मनइ भगवान पर भरोसा नाइ कइ पालन ।
प्रायः मनइ कौनो कामके बारेम सोचते रहलन, ओकर योजना औ वोकर साधनके चिन्ता करते रहलन । कौनो रहियम आएवाला संकटके विषयमे सोचते रहलन, वोकहन न ते रातके नीन आत न दिनके चैन । वोकहन आशंका घेरले रहत, चिन्ता डेरुवइते रहत औ कुशंका ओकहन कौनो काम करेक योग्य नाइ छोडत । प्रगतिक स्थान पर अवनतिये वोकहन हाथेम लागत ।
यी सबके एक कारण बा – मानसिक प्रशिक्षणके अभाव । यदि मनइ चिन्ता छोडके चिन्तन–मनन करे औ मनके प्रसन्न कइले अपन लक्ष्यके वारेम बढे ते निःसंदेह वोकर काम योजना अनुसार होत जाइ, वोहमे कौनो बाधा नाइ आइ । यिहे संबन्भमे एक लडाइक घटना बा – ‘एक बेर प्रथम विश्वयुद्धमे लडाइक दिन भिन्सहरे जब जनरल शुर्ज नीनसे सपनइते उठल ते वोकर मनमे यी विचार आइल कि वोकर मरना दिन आ गइला । उ अपन यी विचारके मनसे हटाएक बहुत प्रयास कइल, वकिन मनमे उठलहवा तर्कके आगे उ असफले रहल । जइसे जइसे वोकर दिन बीतत गइल, वोकर उ विचार बढते गइल । अन्तमे बइठके उ अपन परिवारके अन्तिम पत्र लिखे लागल । जब वोकर मोर्चाके आगेक लाइनमे बोला गइल तब उ जानाता कि वोकर कल्पना शायद सही होएवाला बा । जब उ घोडा पर सवार होइके दुश्मनके ओर आक्रमण करे दौरल ते कुछ छिनके बाद वोकर अंगरक्षक शत्रुक तोपसे मर गइल । यी देखके जनरल शुर्जके एक छिनके खर्तिन लागल कि वोकर सपना सही होएवाला बा, वकिन तब्बो वोकर भित्तर एक भाव जागल कि का सपनक आधार पर उपजल कुशंकक सही मानके जीवनसे हार मान लेहना उचित होइ ? अइसन सकरात्मक भाव अइतेकि भय वाला बात वोकर मनमे एक्को नाइ रह गइल । उ बेझिझकके मोर्चा पर शत्रुनसे लड गइल । जब उ लौटल ते वोकर मुहमे मुस्कान रहे । वोकर बाल भी बाका नाइ होइल रहे ।’ यी घटनामे प्रमुख दुइ बात बा – पहिला यी हो कि संसारमे कठोरसे कठोर औ दृढ से दृढ मनइ भयसे ग्रस्त होइ सकलन औ दुसर यी हो कि हरेक मनइ यदि चाही ते कइसो भी परिस्थितक सकारात्मक चिन्तनसे सही दिशामे मोड सकतन । अइसन चुनौतिपूर्ण परिस्थिति या संकटके सामना हिम्मतके साथ करते चिन्तक सकारात्मक चिन्तनसे हरा देहना वोकेसे छुटकारा पएना हो ।
जीवन एक संघर्ष हो बिना संघर्षके जीवन सुनहरा नाई बनपाई उहेक नाते जीवनमे सिर्फ कर्म कइलजाय फलके आशा न कइलजाय ज्यादा चिन्ता कइले से अपने शरीरके नोक्सान होइत । उहेक नाते जीवनके एक सार्थक बनाएक खर्तिन अपने आपमे चिन्ता न कइके चिन्तन मनन कइलजाय आउर आगे बढल जाय ।

