थारू भाषाक गजल :- मैई कमैयाँ.........

Saturday, 19 May 20180 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}
गजल,,
झुस्मुसे बिहान उठ्खे अाखँ मिच्टि जाउँ मैई कमैयाँ
फाटल चिठल पुउदाँ लगाइल लुगा लगाउँ मैई कमैयाँ
म्वार कर्म अस्त हो कहुँ कि इ संसारके रित अस्त कहुँ
स्कुल पह्रना उमेरम जिम्दरोक भैंस् चराउँ मैई कमैयाँ
तर तिह्वार अाइथ सक्कु होर नाच गान रहारंगि करथ
चाड पर्व कसिन रहथ थाहाँ फेन नैपाउँ मैइ कमैयाँ
बिहानसे सन्झ्याँ भर जिम्दरोक घरम काम कर्ख हुलसेफे
घर परिवार जसिक तसिक गुजार चलाउँ मैई कमैयाँ
भाग्यम ज्या लेखल बाँ उहे भ्वाग परठ कख अाफन मन
सम्झैति दिन रात हप्ता महिना बर्ष बिताउँ मैई कमैयाँ
                              ( हरित दङ्गाली )
Share this article :

Ads2
SHARE THIS POST IN YOUR CHOICE LOCATION

 
Copyright © 2017 - हमार सनेश डटकम.COM - All Rights Reserved.
Design By :- Nabeene Chaudhary | Powered by :- Deepa Mht

| Home | About | Blogs | Contact | RSS*

Admin / Editor :- RN Chau.. Tharu