पहिन पहिन क " दशै " (चितवन थारु भाषामा)

Saturday, 8 October 20160 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}


हमार थारु जातिमा दशै यपने तरिका से मनाेसई जुनकी दशैक जुनउमा
धुसुराक या घिउडा क बलि देके यपने ढंगसे मनाेसई I हाल याक टीका लागेके माेनसई तर पहिन पहिन टिका लगावके चलन हइनाे हलई I

पहिन पहिन हमार थारु गुराे सबह फुलपतिक दिनवासे मनाेई रहलई जुनकी गुराेक चेला सबह फुला लाे्ह्र गाँउ घरक बरियामा जाई रहलई हसे बरियामा जथिपवेतई जस्ने फलफुल,मरचा,तिउना यानक यापन गुरु के देइ रहलई I
एक्कारात क दिनवमा गाँउक जम्मै गुराैवा सबह एक ठाउमा जम्मा-जुट हखके पुजा डहराेई रहलई I जुनकी यपने तरिकासे गुराैवा सबह मन्तर पढके सहयाेगि चेला सबह याकाे ढाेलक बजाके हसे याकाे चेला सबह बेतक लाठी लेके यापन जिउमा देवता चढाेई रहलई I मन्तर:- "तिनिन तिनिन दुदुगाे देवता" यसने करके  गाँउ घर क कानेखाेके जाके मुठीमा भुत धरके यापन बड्कि गुराे के देई रहलइ हसे  उआ रतिया वसने करक बिताेइ रहलई I

उहे दिनवा थारु जातिक दशै हलई हसे धुसुरा ,घिउडा क भाेग देके दशै मनाेसई I   #सूर्य चाैधरी

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