मुक्तक ,,
किहु लघ्घे किहु सायद दुर कराई यिहे प्रेम दिवस
ना जानो महीने सम्झत कि पराई यिहे प्रेम दिवस
जब सबजने लावा सम्बन्ध जोर्नामे तल्लीन रहही
ओहे बेला कोनो प्रेमप्रेमिकन जराई यिहे प्रेम दिवस
सुबी चौधरी (समिक्षा)
घो.न.पा.-४कैलाली
मुक्तक ,,
किहु लघ्घे किहु सायद दुर कराई यिहे प्रेम दिवस
ना जानो महीने सम्झत कि पराई यिहे प्रेम दिवस
जब सबजने लावा सम्बन्ध जोर्नामे तल्लीन रहही
ओहे बेला कोनो प्रेमप्रेमिकन जराई यिहे प्रेम दिवस
सुबी चौधरी (समिक्षा)
घो.न.पा.-४कैलाली
