#गजल
जेठ लागल भाटु कोक्नी निकैना बा
बिहान्नी भात भन्सा तिना रिझैना बा
पस्गुरल "रठी हम्र "काम ढिल कैख
मिझ्निम रोटी खैना पिठा पिसैना बा
आजकाल कटि कटि आइ हो बर्खा
छुटी बाबू हे धान लगाए सिखैना बा
सुख "दुख कर्टी रबि सङ्घ खेट्वम
डर्लक मलके हर हिसाब टिपैना बा
दिन भर घामले पस्नकेल रठु महिन
सयौं जुनि केवल टुहिनसे बिटैना बा
लेखक:=बिर बहादुर कुसुम्या जलन
त्रिपुर १२ दुबिचौरा दाङ
आब आनक ड्यास #KSA
थारू साहित्यम लौव युवा
#फाउन्डेसन
फोटु फेसबुक से साभार
