गजल,,
प्यार भर्ल माेर दिल लैके तुँ जैबाे कहाँ ।
ताेहार प्यार बरी मैगर बा भग्बाे कहाँ ।
लस्गर मैयाँ लगाके घायल बनादेेलाे ।
चल्ते मुटु निकर्लाे माेरहस पैबाे कहाँ ।
रगतके नातासे जुत्ल बा हमार सम्बन्ध ।
हम्मन जन्मजन्मके साथ तुँ देख्बाे कहाँ ।
नाताते अनेकाैँ रहठ बिशेष कलेसे एक ।
उ तुँ हाेलाे सपनामे सताके रहबाे कहाँ ।
(राम अवतार अन्जान)
शिवराज न.पा.३, कपिलवस्तु
