#थारू_भाषाके_कविता
इतिहास लम्मा बा तब्बाे मै लिखेक काेशिस करतुँ ।
कविता बनाके पुरान जबानक बरघरियनके कहानी,,,
लेकि मानेवाला मानत रहन फिर बरघरियलाेगेन अाउर जानेवाला जानत फिर रहन बरघरियान
अाउर बरघरिया अप्ने अापके का साेँच्त रहन
का सम्झत रहन
कि मै गाँवक राजा हाेलु सक्कुजन अावन माेर लग गाेर धराई करे,,,,
चाहे जैसिन रहे चाहे जाैन रहे
एकअाेरसे बहुत बढि्याँ रहे उ चलन कि चाहे जाैन गाँव रहे या डिहवा एक मुठ रहे चाैकीदरवा एक हाँक मरते भरिम सब गाँवक मनै तुतपरत रहन लेकिन अाजकलके जबाना बहुत बदल गैल बा ।
हुनाते पहिले फिर जानत रहन बरघरिया कि गरिबलाेग जब शिक्षित हाेइ जैहिँ ते हमरेन नाई तेरिही अाउर पँहुच धेउर हाेइजाई तब अैसिन शाेंषण हाेएलागल कि गरिबलाेगेके ते जान परे जिएक हक अधिकारे नाई बा अाउर अाउर गरिब लाेगेनते माछिक मुरी बराबर नाई सम्झत रहन अाउर साेँच्त रहन गरिब बनल रहन हम्मनके दास अाउर कर्न जिन्गीभर चाकरी ।
अैसे समय बित्ते गैल अाउर जाईता बा लेकिन एकर जर उखर्ना बहुत जरूरी बा ।
अाेईसिन कहल जाईते बरघरिया कहना चलन अाउर जबाना बहुत कसरतसे बनल बा इतिहास अाेस्ते अभिन कहुँ कहुँ लागू बा ।
तर काैनाे बात नाई बा समाज गतिशील बा अाउर यीहे गतिशीलताक साथसाथे नयाँ युग र चलन परिवर्तन बा अाेकर साथे पुरान जबाना बदल चुक्ल बा अाउर दुनियाँ
२१अाैँ शताब्दीमे प्रवेश कैलेबा यीहे शताब्दीमे शिक्षित समाज बनैना अाप्नीक अाउर हमारीक जैसिन नव जवान युवायुवती मिलके हाठमे हाठ अाउर कहल जाईते काँधमे काँध मिलाके शिक्षित र दक्षित समुदाय बनैना हमार दायित्व अनि जिम्मेवारी हाे यीहे जिम्मेवारी न भुलाईल जाई ।
शिवराज न.पा.३, कपिलवस्तु
#राम_अवतार_चाैधरी
०८ पाैष ०७४
